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कौशांबी के यशोदा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल में मंगलवार को विश्व विटिलिगो दिवस पर विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। इस मौके पर मौजूद त्वचा रोग विशेषज्ञों ने बताया कि विटिलिगो एक प्रकार का त्वचा रोग है। इस रोग से अकेले भारत में लगभग 8.8 प्रतिशत तक लोग जूझ रहे हैं। डॉ. सिद्धार्थ टंडन ने बताया कि विटिलिगो को ल्यूकोडर्मा के नाम से जाना जाता है। त्वचा पर कई सफेद धब्बे बनने शुरू हो जाते हैं और इस स्थिति को सफेद कुष्ठ रोग भी कहा जाता है। शरीर के जो हिस्से सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आते हैं, जैसे चेहरे-हाथ और कलाई के क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित होते है। मौके पर मौजूद त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. गरिमा गुप्ता ने बताया कि सफेद दाग की बीमारी छुआछूत की बीमारी नहीं है। इसे लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। विटिलिगो के इलाज के लिए, टोपिकल, विभिन्न सर्जरी, लेजर चिकित्सा एवं अन्य वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हैं। लोगों में इसके लिए जागरूकता लाना ज्यादा जरूरी है। इस दौरान स्किन डिपार्टमेंट के मरीजों ने भी इस चर्चा में हिस्सा लिया और अपनी समस्या से जुड़े सवाल डॉक्टरों से पूछे।


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साहिबाबाद। कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में विश्व विटिलिगो दिवस के अवसर पर मंगलवार को स्कीन संबंधित बीमारियों को लेकर चर्चा हुई। जिसमें त्वचा रोग विशेषज्ञों ने विटिलिगो बीमारी के बारे में बताया। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ टंडन ने बताया कि विटिलिगो एक प्रकार का त्वचा रोग है। इसे ल्यूकोडर्मा के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में व्यक्ति के शरीर पर सफेद धब्बे बन जाते हैं। इसको सफेद कुष्ठ रोग कहा जाता है। यह शरीर के उन हिस्सों में होता है जो कि सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आते हैं। विशेषज्ञ डॉ. गरिमा गुप्ता ने बताया कि सफेद दाग की बीमारी छुआछूत की बीमारी नहीं है। वहीं उन्होंने बताया कि इसे लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि विटिलिगो के इलाज के लिए टोपिकल, विभिन्न सर्जरी, लेजर चिकित्सा एवं अन्य वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हैं।


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जागरण संवाददाता, कौशांबी: विश्व विटिलिगो (सफेद दाग) दिवस पर कौशांबी के यशोदा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में मंगलवार को सेमिनार का आयोजन किया गया। इस दौरान सफेद दाग की बीमारी को लेकर लोगों को जानकारी दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि यह बीमारी छूने अथवा संपर्क में आने से नहीं फैलती।

अस्पताल के एमडी डा. पीएन अरोड़ा ने दीप प्रज्जवलन के साथ सेमिनार की शुरुआत की। सेमिनार में अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ टंडन ने बताया कि विटिलिगो एक प्रकार का त्वचा विकार है, जिसे सामान्यत: ल्यूकोडर्मा के नाम से जाना जाता है। इसमें रीर की स्वस्थ कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। कुछ रोगियों में त्वचा के अंदर हुआ घाव स्थिर रहता है, बहुत ही धीरे-धीरे बढ़ता है। जबकि कुछ मामलों में यह रोग बहुत ही तेजी से बढ़ता है और कुछ ही महीनों में पूरे शरीर को ढक लेता है। भारतीय सैन्य सेवाओं में सफेद दाग से ग्रसित लोगों को मौका नहीं मिल पाता। डॉ. कुलदीप शर्मा ने बताया कि यह रोग आनुवांशिक और पर्यावरणीय संयुक्त प्रभाव से होता है। हालांकि छूने से यह नहीं फैलता। इसके प्रति समाज में ़फैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। सभी एकजुट होकर इस बीमारी से लड़ेंगे तो इस रोग को जड़ से ़खत्म कर सकते हैं। टोपिकल, विभिन्न सर्जरी, लेजर चिकित्सा एवं अन्य वैकल्पिक उपचार इसके लिए उपलब्ध हैं।



हर साल 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस (World Vitiligo Day) मनाया जाता है। विटिलिगो (Vitiligo) एक प्रकार का त्वचा रोग (skin disease) है। दुनिया भर की लगभग 0.5 प्रतिशत से एक प्रतिशत आबादी विटिलिगो से प्रभावित हैलेकिन भारत में इससे प्रभावित लोगों की आबादी लगभग 8.8 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है।

देश में इस बीमारी को समाज में कलंक के रूप में भी देखा जाता है। विटिलिगो किसी भी उम्र में शुरू हो सकता हैलेकिन विटिलिगो के आधा से ज्यादा मामलों में यह 20 साल की उम्र से पहले ही विकसित हो जाता हैवहीं 95 प्रतिशत मामलों में 40 वर्ष से पहले ही विकसित होता है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलकौशाम्बी के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ टंडन बताते हैं कि विटिलिगो एक प्रकार का त्वचा विकार (skin disorder) हैजिसे सामान्यत: ल्यूकोडर्मा के नाम से जाना जाता है। इसमें आपके शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। इस बीमारी का क्रम बेहद परिवर्तनीय है। कुछ रोगियों में घाव स्थिर रहता हैबहुत ही धीरे-धीरे बढ़ता हैजबकि कुछ मामलों में यह रोग बहुत ही तेजी से बढ़ता है और कुछ ही महीनों में पूरे शरीर को ढक लेता है। वहीं, कुछ मामलों में त्वचा के रंग में खुद ब खुद पुनर्निर्माण भी देखा गया है। इतना ही नहीं मरीज का परिवार भी समाज की भ्रांतियों में पड़कर परेशान होता है। बता दें कि सफेद दाग की बीमारी को लेकर लंबे समय से एक लड़ाई चल रही है। भारतीय सैन्य सेवाओं से लेकर कई तरह की सरकारी नौकरी में भी सफेद दाग की वजह से मौका नहीं मिल पाता।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलकौशाम्बी के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ कुलदीप शर्मा जब आपके शरीर में मेलेनोसाइट्स (melanocyteमरने लगते हैंतब इससे आपकी त्वचा पर कई सफेद धब्बे (White spots) बनने शुरू होते हैं। इस स्थिति को सफेद कुष्ठ रोग (leprosy) भी कहा जाता है। यह आमतौर पर शरीर के उन हिस्सों जो कि सूरज की रोशनी के सीधे संपर्क में आते हैंचेहरेहाथों और कलाई के क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित होते है। डॉ कुलदीप बताते हैं कि विटिलिगो के होने का सटीक कारण को अभी तक पहचाना नहीं जा सका हैहालांकि यह आनुवांशिक एवं पर्यावरणीय कारकों के संयोजन का परिणाम प्रतीत होता है। कुछ लोगों ने सनबर्न या भावनात्मक तनाव जैसे कारकों को भी इसके लिए जिम्मेवार बताया है। आनुवंशिकता विटिलिगो का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता हैक्योंकि कुछ परिवारों में विटिलिगो को बढ़ते हुये देखा गया है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलकौशाम्बी की त्वचा रोग विशेषज्ञ  डॉ गरिमा गुप्ता की अनुसार सफेद दाग की बीमारी छुआछूत की बीमारी नही हैइसके प्रति समाज में फ़ैली भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। इतना ही नहीं मरीज का परिवार भी समाज की भ्रांतियों में पड़कर परेशान होता है।  बता दें कि सफेद दाग की बीमारी को लेकर लंबे समय से एक लड़ाई चल रही है। भारतीय सैन्य सेवाओं से लेकर कई तरह की सरकारी नौकरी में भी सफेद दाग की वजह से मौका नहीं मिल पाता। अगर हम एकजुट होकर इस बीमारी से लड़ेंगे तो इस रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं । उन्होंने बताया कि विटिलिगो के इलाज के लिएटोपिकलविभिन्न सर्जरीलेजर चिकित्सा एवं अन्य वैकल्पिक उपचार उपलब्ध हैं।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटलकौशाम्बी के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ पी एन अरोड़ा ने कहा कि विटिलिगो बीमारी की बारे में एक मिथक या लोगों में एक भ्रम है कि यह छूने से फैलता है। जबकि ऐसा नहीं होता है। इसलिए विटिलिगों को पीडि़तों  के साथ सामान्य व्यवहार कर उनके जीवन में उमंग भरना चाहिए। सामाज में अछूत की नजर से देखे जाने के कारण अक्सर सफेद दाग के पीड़ितों में हीन भावना और मानसिक अवसाद (Mental depression) घर कर लेता है। ऐसे में लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है।


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हिन्दुस्तान टीम,गाज़ियाबाद
Last updated: Sun, 03 Feb 2019 07:07 PM IST
ट्रांस हिंडन। कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल में कैंसर के प्रति जागरूक करने के लिए रविवार को कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कैंसर के संबंध में जानकारी देते हुए जागरूक किया। अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. पीएन अरोड़ा ने बताया कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एकजुट करने के लिए प्रति वर्ष 4 फरवरी को मनाया जाता है। प्रतिवर्ष विश्वभर में 8.8 मिलियन लोगों की मृत्यु कैंसर से होती है। अस्पताल के वरिष्ठ कैंसर रोग सर्जन डॉ. जलज बक्शी ने बताया कि कैंसर कई कारक वाला रोग है। तंबाकू और एल्कोहल का सेवन, अस्वास्थ्यकर आहार एवं शारीरिक निष्क्रियता, दूषित आहार एवं दूषित पेयजल कैंसर के प्रमुख जोखिम के कारक हैं। वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमंत गुप्ता ने बताया कि हर साल 14 लाख नए कैंसर के मामले सामने आते हैं। 40 फीसदी कैंसर सिर्फ तंबाकू के सेवन से होता है। युवाओं में बढ़ती धुम्रपान की लत कैंसर को बढ़ावा दे रहा है।

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कौशांबी स्थित यशोदा अस्पताल को एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बेंगलुरु के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में यशोदा अस्पताल की डायरेक्टर को डॉ. उपासना अरोड़ा को सीआईआई क्वॉलिटी इंस्टिट्यूट ने यह अवॉर्ड दिया। इस उपलब्धि पर डॉ. उपासना अरोड़ा और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पी. एन. अरोड़ा ने अस्पताल के डॉक्टर्स व समस्त स्टाफ को बधाई दी। अस्पताल के ऑपरेशन हेड डॉ. सुनील डागर ने बताया कि बेंगलुरु में राष्ट्रीय क्वॉलिटी समिट का आयोजन हुआ था, जिसमें यशोदा अस्पताल की कौशांबी यूनिट ने भी हिस्सा लिया। अस्पताल को सीआईआई एसएमबी परफॉर्मेंस एक्सिलेंस स्टार आईकॉन अवॉर्ड-2017 से सम्मानित किया गया। सीआईआई इंस्टिट्यूट ऑफ क्वॉलिटी के चेयरमैन आर. मुकुंदन, मैनेजिंग डायरेक्टर डेविड रस्किन, टी. टी. अशोक के हाथ से डॉ. उपासना अरोड़ा ने इस अवॉर्ड को स्वीकार किया।

नवभारत टाइम्स | Updated:


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गाजियाबाद। कौशाम्बी स्थित यशोदा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में एक निःशुल्क पेन मैनेजमेंट कैंप लगाया गया। कैंप का उद्घाटन यशोदा हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. पीएन अरोड़ा ने किया। कैंप में कौशाम्बी, वैशाली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, साहिबाबाद एवं ईस्ट दिल्ली के निवासियों ने निःशुल्क पेन मैनेजमेंट परामर्श की सुविधा का लाभ उठाय। यशोदा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी के वरिष्ठ पेन मैनेजमेंट विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार शर्मा एवं डॉ. सुदेश प्रकाश ने मरीजों को परामर्श दिया। डॉ सुनील शर्मा ने बताया कि पुराने दर्द का इलाज अब बिना ऑपरेशन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी में उपलब्ध करा दिया गया है। कैंप में कमर के दर्द, स्लिप डिस्क, गर्दन के दर्द, जोड़ांे के दर्द , माइग्रेन सर के दर्द, साइटिका, कैंसर की बीमारी की वजह से दर्द के एवं अन्य प्रकार के पुराने दर्द के मरीजों को निःशुल्क परामर्श दिया गया। कैम्प में 100 से अधिक लोग शामिल हुए।

Posted on : September 10, 2018 


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